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मझदार में छात्र ,कैसे लगेगी नईया पार

0 comments, 2017-10-12, 142 views

आज के समय में शिक्षण के जगत में संघर्ष इतना बढ़ गया है कि हम अक्सर विद्यार्थियों को इसमें हार मानते देखते हैं।कितने ही बच्चें स्कूलों और यूनिवर्सिटीज में इसी मानसिक द्वंद्व में रह जाते हैं कि आखिर क्या पढ़ना सही है क्या नहीं।फिर आती है मार्क्स की होड़, और प्रैक्टिकल और असाइनमेंट्स का गणित।इस सबके बाद आता है विश्वविद्यालयों का माहौल,जो कि छात्रों के चरित्र और मानसिक विकास में एक अहम भूमिका निभाता है। युनिवर्सिटी और कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं पर इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।और फिर हर व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य का महत्व भी नहीं समझता।इसीलिए यूनिवर्सिटीज में छात्रों के मेन्टल इवैल्यूएशन की अत्यधिक आवश्यकता है।इससे इसके सुधार की ओर एक कदम उठाया जा सकेगा। रैगिंग जैसी घटनाएँ भी आज कल आम हैं।एक सामान्य जान पहचान और मज़ाक तो एक अलग बात है।पर ये मामूली मस्ती कोई जघन्य अपराध में न बदलने पाए इस बात पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।छात्रों का आपसी सौहार्द यूनिवर्सिटी के माहौल को बेहतर बना सकता है।और साथ ही टीचरों का इन्वॉल्वमेंट भी इसमें अति आवश्यक है।कुल मिलाकर छात्र हर मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं और इसे विराम एक बेहतर व्यवस्था से ही मिलेगा।क्योंकि इस अवस्था में कुशल विकास मुमकिन नहीं।और ये बात हर शिक्षण संस्थान और हर छात्र को समझनी आवश्यक है।तभी छात्रों को बेहतर माहौल मिलेगा।

UPPatrika
प्रिन्सी मिश्रा
यूपी पत्रिका डेस्क
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