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सर्दी ऐसी की सूरज भी दुहाई मांगे, जो हो परदेश में वो किससे रजाई मांगे....

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0 comments, 2018-01-04, 264 views

बहराइच । गरीब,निराश्रित,बेसहारों वा जरूरतमंदों के लिए आस्थाई रूप से स्थापित रैन बसेरों में भी जिले के भ्रष्टाचारी सेंध लगाने से नहीं चूक रहे।हाल यह है कि रैन बसेरों में ना तो आने वालों का ही पता है और ना ही जाने वालों का ही।बावजूद रजिस्टर के मेंटेनेंस में कोई कमी नहीं है।रजिस्टर बता रहे हैं की तीन शिफ्टों में तैनात ड्यूटी कर्मियों के संरछण में सब कुछ चाक चौबंद है। लोगों का कहना है की नगर के रोडवेज,घंटाघर,रेलवे स्टेशन वा कलेक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर जरूरतमंदों के लिये जो रैन बसेरे स्थापित किये गये हैं उसमे कम से कम 50_50 की संख्या में रजाई वा गद्दे होन के साथ साथ आने जाने वाले जरूरतमंदों के नाम व पते रजिस्टर में दर्ज होने चाहिये। लेकिन ऐसे मामलों में भी जहाँ पड़ रही हांड कपाती ठण्ड में किसी रैन बसेरे में शरीर को भेदने वाली बर्फीली हवा तांडव मचा रही है वहीँ किसी में कुत्ते उसे कुदरत का आशियाना समझकर इंसानों से रहम की उम्मीद कर रहे हैं।और जब इसकी सत्यता परखने के लिए हमारे प्रतिनिधि द्वारा धरना स्थल पर स्थापित रैन बसेरे का जायजा लिया गया तो वहीँ धरने पर बैठीं शांती देवी व शैल कुमारी ने बताया की यहाँ ना तो प्रकाश की उचित वयवस्था है और ना ही मुकम्मल रजाई गद्दे की।उन्होंने बतया कि हम लोग जरुरत के सारे सामन खुद लेकर आय हैं।जब मौके पर मौजूद ड्यूटी कर्मी राजेश सिंह से पूंछा गया कि मानको की सूची यहाँ चस्पा क्यों नहीं है तो वह गोल मोल बातें करते हुये जिम्मेदारों पर आरोप मढ़ते हुये कहने लगा यहाँ पर जो उपलब्ध कराया जायेगा उसी में तो काम चलाना होगा।इसके बाद भी जिले स्तर पर रैन बसेरे के व्यापक स्तर पर प्रचार वा प्रसार ना होने के कारण बहुतों को इसकी जानकारी तक नहीं है।सूत्र बताते हैं कि जब यहाँ अलाव जलाने की संख्या में बंदरबांट किया जा रहा है तो रैन बसेरों के स्तर का हाल आसानी से समझा जा सकता है।आपको बतातें चलें कि रैन बसेरों की स्थापनाओं में बड़े बड़े सामजिक कार्यकर्ताओं वा बड़े बड़े अधिकारियों की बड़ी बड़ी फ़ोटो वा बड़ी बड़ी ख़बरें अखबारों की सुर्खियां भी बनीं थीं बावजूद उक्त मामलो को जानने के बाद समस्याओं का कोई पुरसाहाल नज़र नहीं आ रहा है।और अंत में यदि कहा जाय कि_सर्दी ऐसी की सूरज भी दुहाई मांगे ,जो हो परदेश में वो किससे रजाई मांगे। तो शायद गलत नहीं होगा।

UPPatrika
अवनि दीप शुक्ल
संवाददाता
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