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UP : देह व्यापार मामले में 33 महिलाओं समेत 41 को ठहराया दोषी

0 comments, 2022-01-26, 226023 views

    उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद अब प्रयागराज की जिला अदालत (District Court of Prayagraj) में देह व्यापार (flesh trade case) के मामले में 41 आरोपियों को दोषी ठहराया गया. दोषी ठहराए गए 41 लोगों में 33 महिलाएं और आठ पुरुष हैं. यह मामला साल 2016 का है

 
 इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के आदेश पर जिला प्रशासन ने छापेमारी की थी. इस दौरान सौ के करीब नाबालिग लड़कियों व महिलाओं और बच्चों को रेस्क्यू कर छुड़ाया था. छुड़ाई गई लड़कियों को देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां लाकर उन्हें खरीदा बेचा जाता था. उनसे जबरन देह व्यापार कराया जाता था  

इन महिलाओं को किया गया दंडित


स्वर्ण लता, सामंत, दुर्गा कामले, मनीषा, रेखा मां, रागिनी, संगीता, मीनाक्षी, गुलकंदी, सुमन, सत्यभामा, कृष्णा सामंत, कांची, रीना,  हसीना, कृष्णा,  सुभद्रा, शीला, रन्नो, मीना, रानी देवी, पिंकी, बॉबी, रजनी सामंत, उषा, पिंकी, रेखा, मुन्नी सुजाता, विमला, सुमन व सुमित्रा। 
 

यह भी हुए हैं दंडित

अरविंद,  सुनी,  राजू, शुभम, कौश,  सामंत, बबलू सिंह, अभिषेक कुमार व आशीष कुमार।

यह रहा मामला

थाना कोतवाली स्थित बादशाही मंडी (मीरगंज) रेड लाइट एरिया मीरगंज का है। सामाजिक संस्था के कार्यकर्ता सुनील कुमार की शिकायत पर 48  आरोपितों, जिसमें अधिकांश महिला एवं कुछ पुरुष हैं के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी। क मई 2016 को एसडीएम सदर की अगुवाई में रेड लाइट एरिया में दबिश देकर बड़े पैमाने पर कार्यवाही कर पीड़िताओं को आरोपितों के चंगुल से मुक्त कराया गया था। प्रकरण में सरकार बनाम दुर्गा कामले सहित 48  आरोपितों के खिलाफ सत्र न्यायालय में विचारण किया गया। इन पर आरोप है कि मानव तस्करी के माध्यम से देश के कई हिस्सों के बालिग व नाबालिग लड़कियों को लाकर उन्हें बंधक बनाकर उनकी मर्जी के खिलाफ वेश्यावृत्ति कराई जाती थी। उनकी खरीद-फरोख्त की जाती थी। पीड़िताओं ने अपने बयान में कहा था कि हम लोगों को उनके मूल स्थान से बहला-फुसलाकर व लालच देकर यहां लाया गया। हम लोगों का शारीरिक शोषण व जबरन देह व्यापार कराया जाता है। न्यायालय ने कुल 41 अभियुक्तों को अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956 और भारतीय दंड संहिता की धारा 370 और 373 के अपराध में दोष सिद्ध पाया है। दौरान मुकदमा छह आरोपी की मृत्यु हो गई और एक के फरार हो जाने के कारण पत्रावली अलग कर दी गई। इस मामले को शीघ्र निस्तारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि प्रत्येक माह में कम से कम 8 दिन इस मामले की सुनवाई अवश्य की जाएगी।  

अभियुक्तों को किन धाराओं में कितनी-कितनी हुई सजा

अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के अंतर्गत
धारा तीन (1) के तहत दो साल का कठोर कारावास और दो हजार रुपये का जुर्माना।
धारा चार (1) सात साल का कठोर कारावास।
धारा पांच (1) के तहत सात साल का कठोर कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना।
धारा छह (1) के तहत सात साल का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये का जुर्माना।
धारा  सात (1- क) सात साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
धारा नौ में सात वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रुपये का जुर्माना।

भारतीय दंड संहिता 

धारा 373 में  सात साल का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
धारा 370 ( 3) 10 साल का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
धारा 370 ( 4) 10 साल का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
धारा 370 ( 5) 14 साल का कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माना। 
 



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