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इतिहास रचने की ओर भारत का चंद्रयान-2

0 comments, 2019-09-02, 256938 views

लखनऊ। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा में पहले ही सफलतापूर्वक प्रवेश करा चुका है। इसके बाद इसरो आज (2 सितंबर) को चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से लैंडर ‘विक्रम’ को अलग करने की प्रक्रिया करेगा जो आज दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से एक बजकर 45 मिनट के बीच किया जाएगा।
         लैंडर ‘विक्रम’ सात सितंबर को तड़के डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा। देश के दूसरे चंद्रमिशन चंद्रयान-2 ने चंद्रमा की कक्षा में 20 अगस्त को प्रवेश किया था। दो सितंबर को लैंडर ‘विक्रम’ ऑर्बिटर से अलग होने के बाद यह सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा। ऐसा करके भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा। भारत से पहले रूस, अमेरिका और चीन चांद पर पहुंच चुके हैं लेकिन वे चंद्रमा दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में नहीं पहुंच पाए थे।
         लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इसके भीतर से ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर बाहर निकलेगा और अपने 6 पहियों पर चलकर चांद की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। ‘चंद्रयान-2' मिशन की सफलता भारत के लिए गौरवशाली क्षण होगा क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है। ‘चंद्रयान-2' चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा, जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है। इससे चांद के अनसुलझे रहस्य जानने में मदद मिलेगी।



UPPatrika
पवन श्रीवास्तव
संपादक
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