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500 के नोट पर बैन ने छीनी सात महीने के मासूम की ज़िंदगी

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0 comments, 2016-11-11, 480 views

केंद्र सरकार का 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का फैसला कालेधन के खिलाफ कारगर माना जा रहा है। लेकिन ये फैसला आम आदमी की ज़िंदगी पर कितना असर डाल रहा है इसका अंदाजा सरकार को बिलकुल नहीं है। सरकार के इस फैसले ने देश में आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है। देश में कहीं कोई अपने घर वापस नहीं जा पा रहा है तो कहीं किसी की शादी टूट जा रही है और कहीं पर लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहें हैं।
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में ऐसा ही मामला सामने आया है। यहाँ पर जनपद के सबसे बड़े प्राइवेट अस्पताल में 500 और 1000 न लेने की वजह से इलाज के आभाव में एक सात महीने के मासूम ने दम तोड़ दिया। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।
ये मामला जिले के सरायलखंशी थाने इलाके के फातिमा अस्पताल का हैं। जहां पर जिले के सिधवल गांव के निवासी शिवबली गिरी की बेटी अपने सात माह के मासूम बच्चे का इलाज करवाने के लिए आयी थी। चिकित्सकों ने बच्चे को निमोनिया रोग से ग्रसित बताते हुए आकस्मिक विभाग में भर्ती कर लिया। साथ ही परिजनों को दवा सहित अस्पताल के अन्य नियम कानूनों का पालन करने का आदेश दिया। लेकिन जब दावा लेने काउंटर पर गए तो पांच-पांच सौ रुपये के नोट लेने से मना कर दिया। जिसके बाद परिजन खुल्ले पैसे के इंतजाम में जुट गए लेकिन जब तक पैसों का इंतजाम होता तब तक मासूम ने दम तोड़ दिया। जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरु कर दिया। 
हंगामें की सूचना मिलते ही मौंके पर सिटी मजिस्ट्रेट और सिओ सिटी फोर्स बल के साथ पहुचें और मामलें को शान्त कराया। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि सरकार के इस फैसले का सबकों ही सहयोग करना पड़ेगा। पांच सौं और हजार के नोट के चक्कर में थोड़ी बहुत कमियाँ आ रही हैं। वो दो चार दिन में खत्म हो जायेगी। अगर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही सामने आती है तो जांच करा कर कार्यवाई की जायेगी।


UPPatrika
अभिमन्यु वर्मा

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