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550 साल पुरानी ममी के बढ़ते बाल और नाखून बने वैज्ञानिकों के लिए रहस्य

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0 comments, 2016-11-22, 848 views

लाहौल स्पिति वैली: आपने ममी की कहानियाँ तो सुनी ही होगी, और मिस्र की सभ्यता के बारे में भी पढ़ा ही होगा। मिस्र की सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक मानी जाती है। इस सभ्यता के लोगों का यह मानना था कि मरने के बाद भी इंसान ज़िंदा रहता है। इसलिए वहाँ के लोग किसी के मर जाने के बाद उनके शव पर ऐसा लेप लगते थे जिससे शरीर जल्दी सड़ता नहीं था। उसे पट्टियों से पूरी तरह ढककर उसके आवश्यकता की चीजों को उसके शव के साथ एक ताबूत में बंद कर देते थे। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि हम आपको ये सब क्यों बता रहे हैं।
तो हम आज आपको एक ऐसी ममी के बारे में बताएँगे जिसके बारे जानकर आप हैरान हो जाएँगे। हिमाचल प्रदेश में एक जगह है लाहौल स्पिति वैली। जिसके पास एक जगह पर एक लगभग 550 पूरानी ममी है। लेकिन हैरान कर देने वाली तो बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून अभी भी बढ़ रहे हैं।
यह ममी लाहौल स्पिति वैली के ताबों मोनेस्ट्री से क़रीब लगभग 50 किलोमीटर दूर एक गाँव में है जिसका नाम गियू है। यहाँ पर 6-8 महीनों तक बर्फ पड़ती है इस वजह से इस गाँव के बारे में किसी कुछ ज्यादा जानकारी प्राप्त नहीं है।
इस ममी के पीछे एक कहानी है यह ममी तिब्बत से आए हुए एक लामा सांगला तेनजिंग नाम के तपस्वी की है। कहा जाता है कि तेनजिंग ने 45 साल की उम्र में तपस्या की अवस्था में बैठे-बैठे अपने प्राण त्याग दिये थे। हम आपको बता दें ये दुनिया की एक मात्र ऐसी ममी है जो बैठी हुई है।
वैज्ञानिक जाँचों में यह पाया गया है कि यह ममी 550 साल पुरानी है। इस ममी को लेकर कई बातें सामने आयी है जोकि बेहद चौकाने वाली है। आमतौर पर यह पाया गया है कि किसी भी ममी को सड़ने से बचाने से उस पर खास किस्म का लेप लगाया जाता था। लेकिन इस पर किसी भी प्रकार का लेप नहीं लगाया गया फिर भी सुरक्षित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ममी के बाल और नाखून अब भी बढ़ रहे हैं। लेकिन ऐसा कैसे मुमकिन है? यही सवाल सबके मन में घूम रहा है। बताया जाता  है कि यह ममी 1974 के भूकंप में जमीन में दफन हो गयी थी। फिर 1995 में आईटीबीपी के जवानों को यह खुदाई के दौरान मिली। लोगो का यह भी कहना है जब खुदाई की जा रही थी तब कुदाल इसके सिर पर लगा जिससे खून निकालने लगा। इस बात पर यकीन करना तो, मुश्किल है कि किसी 550 पूराने मृत शरीर से खून निकले लेकिन इसके सिर पर उस चोट का निशान अभी मौजूद है। यह ममी कुछ समय तक आईटीबीपी के कैंप में ही रही फिर इसे गाँव में स्थापित कर दिया गया। यहाँ के लोग इस ममी को ज़िंदा भगवान मानकर पूजा करते हैं।


UPPatrika
पवन कुमार
स्वत्रन्त्र पत्रकार
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