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भारत में इस गाँव के लोग पेड़ पर रहते हैं

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0 comments, 2016-12-03, 626 views

रांची: अक्सर आपने लोगों को पक्के मकानों में, झोपड़ियों में, हाउस बोट में रहते हुए देखा होगा। लेकिन आपने कभी इन्सानों को पेड़ों पर रहते देखा है। जी हाँ ये बात सुनकर आप हैरान हो जाएंगे कि भला कैसे कोई पेड़ पर जीवन यापन कर सकता है। झारखंड की राजधानी रांची में कुछ ऐसे परिवार है, जो पेड़ पर घर बनाकर रहने के लिए मजबूर हैं। दरअसल ये परिवार हाथियों के उत्पात से परेशान हैं, जिसके कारण वो उसके खौफ के चलते पेड़ों पर घर बनाकर रहने को मजबूर हैं। ये जंगली हाथी रांची-जमशेदपुर राजमार्ग में इधर उधर घूमते हैं और किसी पर भी अचानक से हमला कर देते है। लोगो हाथियों की उत्पात से बेहद परेशान है। जब हाथी इस राजमार्ग से गुजरते हैं तो कोई भी घंटों तक यहाँ आस-पास भी नहीं भटकता है। लोगों मे इनका खौफ इतना ज्यादा बढ़ गया है कि लोगों ने अब पेड़ों पर रहना शुरू कर दिया है।   
हम आपको बता दें ये घटना रांची से 45 किलोमीटर दूर बुंडु गांव के लोहराटोला की है। जहां पर रहने वाले कुछ परिवारों ने पेड़ों पर ही अपना ठिकाना बना लिया है। वे लोगो हाथियों से इतने ज्यादा दहशत में हैं कि अपनी जान बचाने के लिए पेड़ों पर ही सोते हैं। जंगली हाथियों के एक झुंड ने एक साल पहले इनके घरों को तहस-नहस कर दिया था। जिसके बाद से ये परिवार अपने गाओन छोड़कर पेड़ों पर रहते हैं और जीविका चलाने के लिए खेती करते हैं।  इन परिवारों के मुखिया जानकी मुंडा का कहना है कि दिन के समय हम लोग खेती के काम में लगे रहते हैं। उनके बच्चे हाथियों को भगाने के लिए ईट- पत्थर के टुकड़े इकट्ठा करते रहते हैं। इस गांव में लगभग 15 से अधिक परिवार हैं जोकि जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर ही निर्भर हैं। देखा जाए तो इस गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जो झारखंड में विकास कार्य कराने के राज्य सरकार के दावे का पर्दाफाश करता है। इस गाँव के लोगों का यह भी कहना है कि इन लोगों को अपना बचाव खुद करने के लिए छोड़ दिया गया है और ये लोग खेती करके ही अपना जीवन चलाते हैं। ऐसे में इनके पास ज़िंदा रहने के लिए इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ये हमेशा से हाथियों के खौफ में गुजर-बसर कर रहे हैं। इन लोगो ने  हाथियों से अपनी रक्षा करने के लिए पेड़ों पर ही अपना बसेरा बना लिया है।
झारखंड हाथियों के उत्पात के कारण बड़े पैमाने पर तबाही का गवाह बन रहा है। हाथियों के झुंड खड़ी फसलों और घरों को तबाह कर देते हैं और लोगों को मार डालते हैं। वर्ष 2000 के नवंबर में जब से बिहार को काटकर झारखंड का गठन हुआ है तब से अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में हाथियों की संख्या वर्ष 2007 में जहां 624 थी वह 2022 में बढ़कर 688 हो गई। विभिन्न कारणों से कम से कम 154 हाथियों की विभिन्न कारणों से मौत हो चुकी है। इनमें बिजली का करेंट लगने से, रेल ट्रैक पार करते समय पटरी पर कटने से या जहरीला पदार्थ खा लेने से। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों ने हाथियों के आने-जाने के रास्ते में घर बना लिया है इसी वजह से यह टकराव हो रहा है। झारखंड के वन एवं पर्यावरण सचिव सुखदेव सिंह ने कहा, हम लोग पेड़ों पर रहने वाले परिवारों को हर संभव मदद के लिए तत्काल एक वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम भेजेंगे। हर संभव सहायता दी जाएगी।



UPPatrika
अभिमन्यु वर्मा

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