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ओलंपियन रहीं पूनम रानी ने बयां किया दर्द, बोली: ऐसी नौकरी से तो जूते भी नहीं खरीद सकती

0 comments, 2016-12-14, 1118 views

भारत एक ऐसा विशाल देश है जहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। लेकिन कहीं न कहीं भारत में पैसे की कमी कारण प्रतिभा छुपकर रह जाती है। उनकी ही प्रतिभा सबके सामने आ पाती है जिनके पास पैसा है, या फिर जो हालातों से लड़ना जानते हैं। उन लोगों में पूनम रानी भी शामिल हैं, जिनमें ऐसा टैलेंट है कि सिर्फ 15 साल की उम्र में उनका सेलेक्शन इंटरनेशनल टीम में हुआ और उन्होंने ढेरों मेडल अपने नाम किये। ओलंपिक में भी टीम इंडिया के लिए खेला। कहने को तो वह हरियाणा की शान है लेकिन, सरकार ने अब तक उन्हें न तो अच्छी नौकरी दी और न ही कभी उनका सम्मान किया। पूनम ने अपने इस दर्द को एक न्यूज़ वैबसाइट को दिये इंटरव्यू में बयां किया है।
भारतीय महिला टीम की ओलंपियन रहीं पूनम इस वक्त रेलवे में कमर्शियल क्लर्क के तौर पर जॉब कर रही हैं। उनका कहाँ है कि मुझे दो महीने पहले तक सिर्फ 15 हजार रुपए महीने मिल रहे थे। अब कुछ बढ़े हैं, लेकिन इसके बावजूद मैं एक महीने की पूरी सैलरी भी लगा दूं तो भी अपने लिए खेलने वाले जूते नहीं खरीद सकती। खेल से रिटायरमेंट के बाद तो खेल से पैसे मिलने बंद हो जाएंगे। ऐसे में उन्हीं पैसों का सहारा होगा।
उन्होने बेहतर नौकरी की मांग करते हुए सरकार से पूछा है कि मैं डीएसपी क्यों नहीं बन सकती? उन्होने कहा कि हरियाणा पूर्व कांग्रेस सरकार ने तो कितने स्पोर्ट्स स्टार्स को कोटे से डीएसपी सहित कई अच्छे रैंक दिए। खासकर ओलंपियंस के लिए तो बहुत कुछ किया। अब मैं भी ओलंपियन हूं। ढेरों मेडल भी जीते हैं देश के लिए, लेकिन सरकार ने न तो सम्मान किया और न ही कोई अच्छी जॉब का ऑफर दिया। समझ नहीं आता मैं क्यों नहीं डीएसपी बन सकती हूं या क्यों मुझे अवॉर्ड नहीं दिया जा सकता?
इस बात के दौरान जब उनसे जानना चाहा गया कि भारतीय टीम ओलंपिक में मेडल तक क्यूँ नहीं पहुँच पायी। उस समय पूनम भी भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य थी। उन्होने बताया कि देखिए, उस वक्त टीम के 5-6 खिलाड़ी चोटिल हो गईं थी। इस वजह से हम मेडल तक नहीं पहुंच सके। विदेशी टीमें फिट थीं। उनकी स्पीड भी काफी अच्छी थी। बता दें कि 36 साल बाद भारतीय टीम ने रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया था, लेकिन मेडल तक नहीं पहुंच सकी। इससे पहले 1980 के मास्को ओलंपिक में खेला था।


UPPatrika
पवन कुमार
स्वत्रन्त्र पत्रकार
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