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मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे घोटाले में दो पूर्व डीएम के खिलाफ होगी कार्रवाई, बैनामों को निरस्त करने की मिली मंजूरी

0 comments, 2019-11-20, 516624 views

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न कैबिनेट बैठक में मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण मामले में अनियिमतताओं के लिए जिम्मेदार दो तत्कालीन जिलाधिकारियों सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई व धारा-3 डी की अधिसूचना जारी होने के बाद किए गए बैनामों को निरस्त करने की मंजूरी दे दी है। तत्कालीन मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में सीबीआई या अन्य किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराने की संस्तुति पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इस पर आगे विचार होगा। राज्य सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए गाजियाबाद के ग्राम डासना, रसूलपुर सिकरोड, कुशलिया तथा नाहल में अधिग्रहीत भूमि के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थी। मेरठ के तत्कालीन मंडलायुक्त प्रभात कुमार से इसकी जांच कराई गई। पड़ताल में पता चला कि एनएच एक्ट-1956 की धारा 3(ए) की अधिसूचनाआठ अगस्त 2011 व 3 (डी) की अधिसूचना 2012 में हुई। अवार्ड वर्ष 2013 में हुआ। अवार्ड के विरुद्ध भू-स्वामियों ने आर्बीट्रेशन (मध्यस्थता) वाद दाखिल किए। आर्बीट्रेटर द्वारा वर्ष 2016 व 2017 में आर्बीट्रेशन में आदेश पारित किए गए तथा नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013 के अनुसार प्रतिकर तय कर दिया गया। मण्डलायुक्त मेरठ ने जांच में संस्तुति की कि एनएचएक्ट-1956 की धारा 3(डी) के बाद जमीन खरीदी गई। तत्कालीन जिलाधिकारी व आर्बीट्रेटर गाजियाबाद ने आर्बीट्रेशन वादों में नये भूमि अर्जन अधिनियम 2013 के अन्तर्गत प्रतिकर की दर को बढ़ा दिया गया। जिसके कारण प्रतिकर का वितरण नहीं हो पाया और वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया। कब्जा न मिल पाने के कारण परियोजना का कार्य अवरुद्ध है। प्रभात ने इस निर्णय के पीछे भ्रष्टाचार मानते हुए मामले की जांच सीबीआई या उच्चस्तरीय एजेंसी से कराने की संस्तुति की थी। मंत्री ने बताया कि इस मामले में गाजियाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी विमल कुमार शर्मा व निधि केसरवानी व अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति है। कैबिनेट ने धारा-3 डी के अंतर्गत3 अधिसचना जारी होने केबाद किए गए बैनामों को निरस्त करने व इसमें संलिप्त जिलाधिकारियों के विरुद्ध जारी कार्रवाई जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा नियम विरुद्ध प्रक्रिया में शामिल व जांच में दोषी पाए गए किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध यदि कार्रवाई नहीं की गई है तो अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सीबीआई या अन्य एजेंसी से जांच के संबंध में आगे विचार होगा।


UPPatrika
पवन श्रीवास्तव
संपादक
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