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गोरखपुर: मुम्बई के टाटा अस्पताल की तर्ज पर यूपी में भी अणु से संभव होगा कैंसर का इलाज

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0 comments, 2017-03-10, 506 views

पूर्वांचल में शीघ्र ही परमाणु ऊर्जा विभाग की मदद से कैंसर जैसी घातक बीमारी से निजात मिलेगी। मुम्बई के टाटा मेमोरियल अस्पताल की तर्ज पर ही यूपी के गोरखपुर में भी शीघ्र ही टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टिट्यूट खोल जायेगा। इस दिशा में बार्क ने दिलचस्पी दिखाना शुरू कर दिया है। बताते चले की पूर्वांचल में एम्स का सपना जहाँ  भावनात्मक मुद्दा बन चूका है वही भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) की यह पेशकश निश्चित ही रंग लाएगी। इसके लिए  बार्क उत्तर प्रदेश सरकार की मदद करने को तैयार है। 
मुम्बई में चल रही कार्यशाला के दौरान भाभा रीसर्च सेण्टर के मुख्य महा प्रबंधक बी0 के0 पाठक ने बार्क के वैज्ञानिकों के साथ बताया कि कैसे अणु से बिना रेडियसन कैंसर जैसे बीमारी को ठीक किया जा सकता है। देश के कई स्थानों पर कैंसर इंस्टिट्यूट खुलेंगे जिसमे गोरखपुर प्रस्तावित ही नहीं बल्कि हरी झंडी मिल चुकी है। वही बार्क के वैज्ञानिको ने बताया कि फरीदाबाद की बड़खल झील को फिर से भरा जायेगा। उनका कहना था कि आइसोटॉप तकनीक के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के कई सूख चुके झरनों को फ़िर से शुरू करा देने में सफलता मिल चुकी है, तो वॉइस ऑफ़ फ्रीडम ने उनसे फ़रीदाबाद की मशहूर बडख़ल झील के सूखने की चर्चा की और पूछा की क्या इस तकनीक से इस झील को भरने में कोई मदद मिल सकती है। 
इस सवाल के जवाब में  रेडियो केमिस्ट्री एंड आइसोटॉप ग्रुप के डायरेक्टर डॉ. बी.एस. तोमर ने कहा कि आइसोटॉप तकनीक के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि पानी किन झरनों या स्रोतों से इस झील में आता था और इस झील में जाने वाला पानी कहाँ रिस जाता है। यह तकनीक ज्यादा खर्चीली भी नहीं है। डॉ.तोमर ने कहा कि यदि हरियाणा सरकार चाहे तो बार्क की टीम इस स्टडी में हरियाणा सरकार की मदद कर सकती है। बस हरियाणा सरकार को एक पत्र बार्क अधिकारियों को भेजना होगा। दशकों पहले डॉ. तोमर खुद कई बार बडख़ल झील का लुत्फ़ उठा चुके हैं। झील का सूखना उनके लिए भी चिंतित कर देने वाला था।
गौरतलब है कि बडख़ल झील को भरने के लिए अभी तक कई योजनाएं बनीं। अरबों रुपए खर्च हुआ। लेकिन बिना सटीक वैज्ञानिक अध्ययन के यह सारा पैसा व्यर्थ हो गया। हाल ही में प्रदेश के पर्यटन मंत्री श्री राम विलास शर्मा ने इस झील को भरने की बड़ी योजना पर काम करने की घोषणा की थी। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह योजना 1000 करोड़ रुपए की है। गौरतलब है कि बडख़ल झील को भरने का बीड़ा दो साल पहले स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव श्रीमती सीमा त्रिखा ने उठाया था। 
 वॉइस ऑफ़ फ्रीडम की चिंता यह है कि अगर व्यवस्थित अध्ययन नहीं हुआ तो यह पैसा भी बेकार चला जायेगा।


UPPatrika
पवन कुमार
स्वत्रन्त्र पत्रकार
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