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मर्यादाओं को हमेशा सर्वोच्च स्थान देने वाले ही मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम है

0 comments, 2017-04-04, 998 views

देशभर में रामनवमी या नवरात्री का त्योहार बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। कई लोग सात दिनों तक मां दुर्गा की पूजा अर्चना कर आठवें दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराकर अपना उपवास तोड़ते हैं। साथ ही कई लोग आठ दिनों तक व्रत रखने के बाद नौवे दिन उपवास तोड़ते हैं। लोग राम नवमी के दिन ब्राहमणों को भी भोजन करवाते हैं। नौवे दिन को ही राम नवमी कहा जाता है। हिन्दु धर्म के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। इस त्योहार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। रामनवमी का त्यौहार भगवान श्री राम के जन्मोस्तव के रूप में बढ़ी धूम धाम से सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है | यह दिन हर साल चैत्र महीने  में नवमी को आता है | सनातन धर्मी राम भक्त बड़ी उत्सुकता से इस दिन श्री राम के जन्म का उत्सव मनाते है | भगवान श्री राम अपने मानवीय गुणों से सभी हिन्दुओ के लिए हमेशा एक आदर्श देवता रहे है | वे सबसे अच्छे पुत्र , पति , राजा और पिता के रूप में देखे जाते है बचपन से ही शान्‍त स्‍वाभाव के वीर पुरूष थे। उन्‍होने मर्यादाओं को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया था। इसी कारण उन्‍हे मर्यादा पुरूषोत्तम राम के नाम से जाना जाता है। उनका राज्य न्‍यायप्रिय और खुशहाल माना जाता था। इसलिए भारत में जब भी सुराज की बात होती है, रामराज या रामराज्य का उदाहरण दिया जाता है। धर्म के मार्ग पर चलने वाले राम ने अपने तीनो भाइयों के साथ गुरू वशिष्‍ठ से शिक्षा प्राप्‍त की। किशोरवय में विश्वामित्र उन्‍हे वन में राक्षसों द्वारा मचाए जा रहे उत्पात को समाप्त करने के लिए ले गये। राम के साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण भी इस काम में उनके साथ थे। ताड़का नामक राक्षसी बक्सर (बिहार) मे रहती थी। वहीं पर उसका वध हुआ। राम ने उस समय ताड़का नामक राक्षसी को मारा तथा मारीच को पलायन के लिए मजबूर किया। इस दौरान ही विश्‍वामित्र उन्हें मिथिला ले गये। वहाँ के विदेह राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए एक समारोह आयोजित किया था। जहॉं शिव का एक धनुष था जिसकी प्रत्‍यंचा चढ़ाने वाले शूरवीर से सीता का विवाह किया जाना था। बहुत सारे राजा महाराजा उस समारोह में पधारे थे। बहुत से राजाओं के प्रयत्न के बाद भी जब धनुष पर प्रत्‍यंचा चढ़ाना तो दूर धनुष उठा तक नहीं सके, तब विश्‍वामित्र की आज्ञा पाकर राम ने धनुष उठा कर प्रत्‍यंचा चढ़ाने की प्रयत्न की। उनकी प्रत्‍यंचा चढाने की प्रयत्न में वह महान धुनुष घोर ध्‍‍वनि करते हुए टूट गया। महर्षि परशुराम ने जब इस घोर ध्‍वनि सुना तो वहाँ आगये और अपने गुरू (शिव) का धनुष टूटनें पर रोष व्‍यक्‍त करने लगे। लक्ष्‍मण उग्र स्‍वाभाव के थे। उनका विवाद परशुराम से हुआ। तब राम ने बीच-बचाव किया। इस प्रकार सीता का विवाह राम से हुआ और परशुराम सहित समस्‍त लोगो ने आशीर्वाद दिया। अयोध्या में राम सीता सुखपूर्वक रहने लगे। लोग राम को बहुत चाहते थे। उनकी मृदुल, जनसेवायुक्‍त भावना और न्‍यायप्रियता के कारण उनकी विशेष लोकप्रियता थी।
राम नवमी का महत्व
यह त्योहार हिन्दु धर्म से जुड़े लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस त्योहार के साथ ही मां दुर्गा के नवरात्री महोत्व का समापन भी जुड़ा हुआ है। पुराणिक कथाओं की बात करें तो भगवान राम ने भी मां दुर्गा की पूजा की थी, जिससे कि उन्हें युद्ध के समय विजय दिलाई थी। इन दोनों पर्व का एक साथ मनाए जाना इन त्योहारों की महत्ता को और बढ़ावा देता है। इसी के साथ यह भी कहा जाता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानसे की रचना का आरंभ किया। राम नवमी का व्रत जो भी करता है वह व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और साथ ही उसे शुभ फल प्रदान होता है। भगवान श्री राम में वे सभी गुण थे जो धर्म में बताये गये है | श्री राम वैदिक सनातन धर्म की जान आत्मा है |वेदों को मानने वाले श्री राम के परम भक्त है |
महान महाकाव्य रामायण जिन्हें महर्षि वाल्मीकिजी ने लिखा है , श्री राम मुख्य पात्र है | अवतरित हुए भगवानो में यह सबसे प्राचीन और ऊपर है | यह सबसे अच्छे उदारण है अच्छे बेटे , अच्छे पति होने के | भगवान् श्री विष्णु के यह7वे अवतार है | श्री राम असुर सम्राट लंकापति रावण से इस धरती को बचाने के लिए अवतरित हुए |रावण को यह वरदान प्राप्त था की वो किसी भी देवी देवता के हाथो नहीं मर सकता है अत: भगवान विष्णु मानव रूप में इस धरा पर अवतरित हुए | श्री राम को मर्यादा पुरषोतम के नाम से भी जाना जाता है | राम नवमी भारत में मनाया जाने वाला बहुत ही प्राचीन त्योहार है। यह केवल भारत में ही विदेशों में रह रहें भारतीयों द्वारा भी मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब देश में छोटी जातियों को कुछ समझा नहीं जाता था, तब रामनवमी ही ऐसा त्योहार था जिसे शुद्र जैसी जातियां भी सबके साथ मिलकर मनाती थी। 

रामनवमी पर कैसे करे पूजा जाने :
रामनवमी के दिन श्री राम भक्त भगवान प्रभु के लिए व्रत रखते है | श्री राम के मंत्रो का उच्चारण करते है और उनके भजन सुनते और गाते है | कुल मिलाकर पूरा दिन राम भक्ति में लगे रहते है | शाम को राम मंदिर में या अपने घर पर राम दरबार को सजाते है और प्रभु के भोग लगाकर अपना व्रत खोलते है | “राम लल्ला की जय “ यही सभी भक्तो के जुबान पर होता है | श्री राम की पूजा के साथ साथ पुरे दरबार की पूजा की जाती है जिसमे श्री राम , उनकी धर्मपति माँ सीता उनके भाई लश्मन , भरत , शत्रुघ्न और श्री हनुमान है |इस दिन अयोध्या में रामजन्म का विशेष आयोजन होता है कनक भवन में नवमी के दिन करोडो लोग पहुचकर प्रसाद लेकर पुण्यार्जन करते है 
राम नवमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर राम भक्त नित्य कर्म से मुक्त होकर नहा लेते है | फिर या तो श्री राम मंदिर में जाकर या फिर अपने घर के मंदिर में राम प्रतिमा में भगवान के रूप को देखकर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाये देते है | फिर पुष्प माला से श्रृंगार करके आरती करते है और भगवान श्री राम के महा मंत्रो से जयजयकार करते है | राम भक्तो के द्वारा पुरे दिन उपहास रखा जाता है | शाम को श्री राम जी का जुलुस और शोभा यात्रा निकाली जाती है.


UPPatrika
G K Srivastav
संवाददाता
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