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वायरस जिसका इलाज नही ढूंढ पाये साइंटिस्ट, कई देश की महिलाओ को दी जाती है गर्भवती न होने की सलाह

0 comments, 2017-05-28, 680 views

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने भारत मे भी जिका वायरस के तीन मामलो की पुष्टि कर दी है। अहमदाबाद से आए तीन मामलो मे दो मामले गर्भवती महिलाओ के है। मच्छर से फैलने वाले इस वायरस से सामन्यतौर पर विशेष प्रभाव नवजात बच्चो पर पड़ता है। जिका वायरस के शुरूआती 2 से 7 दिनो के लक्षणो मे हल्का बुखार, स्किन पर रैशेज और मसल्स व ज्वाइंट पेन जैसी प्राब्लम होती है। 
जिस गर्भवती महिला मे जिका वायरस प्रवेश कर जाता है उसके शिशु मे मेंटल डिसआर्डर होने की आशंका रहती है। इन्ही कारणो के चलते कोलंबिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर औऱ जमैका मे महिलाओ को गर्भवती न होने की सलाह दी जाती है। जानकारी के मुताबिक जिका वायरस को सबसे पहले 1947 मे यूगांडा के जिका जंगल मे देखा गया था। जिस कारण इसका नाम जिका रखा गया था। WHO के मुताबिक जिका मे RNA वायरस पाया जाता है। जिसके चलते इससे ग्रसित मच्छर अगर किसी व्यक्ति को काट लेता है तो यह वायरस उसके शरीर मे प्रवेश कर जाता है। 
जिका वायरस मुख्यतः मेंटल डिसाआर्डर्स के लिए जिम्मेदार है। जिसके चलते बड़ी संख्या मे अविकसित मस्तिष्क या छोटे सिर वाले बच्चे पैदा हो रहे है। वही इस वायरस के कारण बच्चो मे मौत भी देखी जा रही है। 

UPPatrika
पवन कुमार
स्वत्रन्त्र पत्रकार
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