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सोनू के घर शाह का लंच, तो क्या भाजपा कर रही यादव वोटों में सेंधमारी की कोशिश

0 comments, 2017-07-30, 674 views

कार्यकर्ता सोनू यादव के घर दोपहर का भोजन करने के अमित शाह के नए पैंतरे से लगता है कि अब सपा मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र वर्तमान सपा मुखिया अखिलेश यादव को प्रदेश में किसी और यादव नेता को शीर्ष स्तर पर न पहुंचने देने की कीमत देनी होगी। जिस तरह की अटकलें लग रही हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकती है, तो जाति के नाम पर परिवार को राजनीति में स्थापित होने वाले मुलायम -लालू खानदान के नेता पुत्रों को आम यादव युवाओं से चुनौती मिलने लगेगी। मुलायम सिंह यादव ने अपनी बिरादरी के किसी नेता को राज्य में मजबूत नहीं होने दिया। गौर तलब है कि रामनरेश यादव, मित्रसेन यादव, रामसुमेर यादव, डीपी यादव, बलराम यादव, अवधपाल यादव यूं तो अपनी जाति के बडे नेताओं में गिने जाते रहे, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने धीरे-धीरे अपनी जाति का वटवृक्ष बनकर सभी को बौना कर दिया। आजमगढ में रमाकांत यादव कई बार सांसद चुने गये। उनका राजनीतिक कद काफी बढ़ता जा रहा था। बिरादरी में बडे नेता के रुप में उभर रहे थे। मुलायम सिंह यादव ने 2014 में मैनपुरी छोड आजमगढ से लोकसभा का चुनाव लडा और रमाकांत को हराया। हार की वजह से लगातार आगे बढ रहे रमाकांत की तेजी में ब्रेक लगा। भाजपा उम्मीदवार के रुप में चुनाव लडे रमाकांत यादव को अभी भी इसकी टीस है। डीपी यादव के खिलाफ मुलायम ने रामगोपाल यादव को लड़ा कर उन्हें हरवाया था। जानकार कहते हैं कि आज डीपी यादव की जो दुर्दशा है, वह मुलायम सिंह यादव के कारण है। विधानसभा चुनाव 2017 के पूर्व गैर यादव -गैर जाटव वोटों को तोड़ने में जुटे भाजपा के रणनीतीकार अब सीधे सपा के यादव और बसपा के जाटवों के वोट बैंक पर धावा बोल कर मुलायम -लालू और मायावती को उन्हीं के समाज से विकल्प देने की तैयारी में है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लखनऊ में इसी वजह से सोनू यादव के यहां अपना दोपहर का भोजन रखवाकर खूब प्रचार करवाया, जिससे यूपी के साथ बिहार के राजनैतिक परिस्थितियों को भी साधे रखने का दांव सफल हो सके। इससे पहले पार्टी कार्यालय में अमितशाह की उपस्थित में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश मंत्री सुभाष यदुवंश को भी अन्य कई से अधिक महत्व दिया गया। फिलहाल उत्तर प्रदेश में यादव मतदाताओं की संख्या बड़ी है। 44 फीसदी

UPPatrika
पवन कुमार

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