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अमेठी की विकास योजनाओं में करप्शन की पोल खोलती ये सड़क

0 comments, 2017-08-12, 738 views

शिवकेश शुक्ला.अमेठी: सूबे के जनपद अमेठी की विकास योजनाओं में करप्शन किस हद तक घुस चुका है, इसके साक्ष्य के लिए ऊपर की ये तस्वीर ही काफी है ये गड्ढा नहीं बल्कि कार्यदायी संस्था का भ्रष्टाचारी मुंह है जिसने 9.497 लाख रुपए खाकर डकार तक नही लिया है यह मुंह जनपद के मुसाफिरखाना में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय को सड़क से जोड़ने वाले लिंक रोड पर सरलता से देखने को मिल जायेगा ,जहाँ भ्रष्टाचार ने अपना मुँह खोल हमारे अमेठी के विकास निगल रहा है जिन सड़कों को सालो टिकाऊ होने का अफसर और इंजीनियर प्रमाण पत्र ठेकेदारों को टिकाते हैं, वह रोड लगभग 6 महीने के भीतर ही ध्वस्त हो जाती है डी एम साहब ये करप्शन नहीं तो क्या है? क्या कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लिंक रोड पर इस को गड्ढे जन्म देने वाले दोषियों पर आप कार्रवाई कर सकेंगे? महज 130 मीटर में 9.497 लाख खा गई ये लिंक सड़क- क्रिटिकल गैप्स योज़ना के तहत बनने वाली सड़को को लेकर कार्यदायी संस्था उ०प्र० ग्रामीण आवास परिषद ने भ्रष्टाचार राह अख्तियार कर लिया जिसके चलते इस संस्था द्वारा अमेठी के मुसाफिरखाना में कस्तूरबगांधी आवासीय बालिका विद्यालय को जोड़ने वाली इंटरलॉकिंग सड़क में भ्र्ष्टाचार की सुरंग सी बनती दिख रही है । सड़क निर्माण की कार्यदायीं संस्था उ०प्र०ग्रामीण आवास परिषद द्वारा क्रिटिकल गैप्स योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में बनाये गए मुसाफिरखाना नगर पंचायत अन्तर्गत कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के इंटरलॉकिंग महज 130 मीटर लम्बाई के सम्पर्क मार्ग की लागत 9 लाख 49 हजार 7 सौ रुपये दिखाकर शिलापट्ट लगा दिया । पहली ही बरसात नही झेल पायी ये लिंक सड़क- सड़क के शिलापट्ट में साफ-साफ लिखा है कि महज 130 मीटर की इंटरलॉकिंग सड़क बनाने में 9.497 लाख उड़ा दिया गया लाखो रूपये खर्च होने के बावजूद इस इंटरलॉकिंग सड़क आपको में गड्ढे ही गड्ढे दिखते हैं। 9.497 लाख रुपए लागत से हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता निर्माण के लगभग छः महीने के भीतर ही मुंह चिढ़ाने लगी विद्यालय को सड़क से जोड़ने वाले लिंक का पहली बरसात में ही निर्मित सड़क के कई हिस्से में गड्ढे उभर आए जिसने जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ और कार्यदायी संस्था द्वारा किए गये भ्रष्टाचार की पोल खोल दी । एक पेच यह भी- आप यह जानकार हैरान होंगे कि सालो टिकाऊ प्रमाण पत्र वाली सड़क जब महीने में टूट जाती है तो ठेकेदार, इंजीनियर, कार्यदायी संस्था समेत अफसर और कुछ नेताओं की बांछे खिल जाती हैं क्योंकि एक बार फिर से इसी रोड का टेंडर लगेगा, कमीशन खोरी होगी और फिर ठेकेदार सड़क पर लीपापोती करेगा।

UPPatrika
शिवकेश शुक्ला
संवाददाता
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