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मूर्तिकार वेदप्रकाश की कलाकृति मे देखिये जान डालने वाली कला

0 comments, 2017-08-22, 596 views

लखनऊ । कलाकरो की कलाकृति को देखते ही लोगो मे एक उत्साह एक नई तरंग उत्पन्न होने लगती है। उनकी इस कलाकृति से मूर्ति मे मानो जान डालने की ही कसर रह जाती है, ऐसी करते है कलाकारी। बता दें कि हाथो की कलाकारी से लोगो के मन को जीतने वालो की कमी नहीं है। हमारे देश मे काफ़ी ऐसे कलाकार है, जो मूर्ति का निर्माण कर उनकी ऐसी आकृति तैयार कर देते है की मानो साक्षात उस मूर्ति का असली रुप प्रकट हो गया हो, मानो की जैसे मूर्तियां कुछ बोलने ही वाली है। ऐसी कलाकृति की हम सराहना व प्रणाम करते है। इनकी मूर्ति की बनावट मे एक अलग रंग उत्पन्न होने लगती है। ऐसे ही कलाकारी मे माहिर महोबा जनपद में कबरई कस्बा के चन्द्रावल रोड के पास स्थित मकान निवासी श्री वेदप्रकाश शुक्ला भी कलाकृति बनाने मे बहुत माहिर है साथ ही इनकी कला ही इनका जीवन है जिससे इनका बहुत नाम है। मूर्ति को ऐसी कला व सुन्दर रुप प्रदान करते है। कलाकृति के रुप मे फिर चाहे दुर्गा जी की मूर्ति हो या फिर गणेश जी की या फिर किसी भी मूर्ति को कला या रुप रंग से ढाला गया हो। इस तरह उनकी मिट्टी से बानाई गई कला को एक अलग रंग रुप देते है की उनको देखकर लगता है की बस अब मूर्ति हमसे बात ही करने वाली है। कबरई मे तथा दूर दूर तक आधा सैकड़ा गांव के लोग वेदप्रकाश शुक्ला की मूर्ति के पसंदीदा है। तथा चढावा देकर उन्हें लेकर भी जाते है। वेदप्रकाश जी को भगवान ने जुबान जरुर ही नहीं दी है जबकि वह बोल भी नहीं सकते लेकिन वह अपनी हाथो की कला से सबका बोलना जरुर बन्द कर सकते है। तथा उपर वाले यानी ईश्वर ने उसको हस्तकला की ऐसी सुन्दर कला दी है। जिसे वेदप्रकाश जी को ईश्वर से कोई शिकायत नहीं है और वह अपनी इस कला पर गर्व भी करते। जिससे अपने मन व हाथो के सहयोग से ऐसी कलाकृति तैयार करते है की सभी मन्त्र मुक्ग व भावविभोर हो जाते है और उस इस तरह से ढाली गई मूर्ति कलाकृति की चर्चाऐं दूर - दूर तक होती है।

UPPatrika
शीबू खान
स्वत्रन्त्र पत्रकार
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