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लेख : जन्मदिन विशेष: लगातार 12 फ्लॉप फिल्में देने के बाद यह एक्टर आज है सदी का महानायक

UPPatrika

पवन श्रीवास्तव

Lucknow

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2018-10-11, 0 comments, 254176 views

जन्मदिन विशेष: लगातार 12 फ्लॉप फिल्में देने के बाद यह एक्टर आज है सदी का महानायक

वह बचपन में इंजीनियर बनना चाहते थे. उनकी ख्वाहिश थी कि वह वायुसेना में काम करें मगर किस्मत ने उन्हें सदी का महानायक बना दिया. जिनके जैसा ना कोई हुआ था..ना कोई हुआ है..और ना ही कोई होगा.... जी, हां मैं बात कर रहा हूं मेगास्टॉर अमिताभ बच्चन की जिनका आज जन्मदिन हैं. अमिताभ बच्चन आज 76 साल के हो गए हैं. अमिताभ आज भी जो किरदार निभाते हैं वो यादगार बन जाते हैं.  आज भी अमिताभ का जलवा ऐसा है कि हर रविवार को उनके घर के बाहर उनके चाहने वाले उनकी एक झलक पाने के लिए जमा होते हैं. 

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद मे हुआ था. अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन अमिताभ का नाम इंकलाब रखना चाहते थे. लेकिन  मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर उन्होंने अपने बेटे का नाम अमिताभ रखा.  अमिताभ का सरनेम श्रीवास्तव हुआ करता था. लेकिन उनके पिता हरिवंश राय ने अपना पेन नेम बच्चन चुना था, इसलिए अमिताभ ने भी अपने नाम के आगे बच्चन लगा लिया. इस तरह से अमिताभ श्रीवास्तव से वे अमिताभ बच्चन बन गए.

अमिताभ बच्चन ने शुरुआत की पढ़ाई सेंटमेरी स्कूल में की. इसके बाद उन्हें नैनीताल के शेरवुड स्कूल में भेजा गया. स्कूल में अमिताभ लगभग हर साल एक्टिंग में भाग लेते थे. अमिताभ की पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' थी. कुछ समय बाद उन्हें “आनंद” फिल्म में काम करने का मौका मिला, इस फिल्म में  उनके साथ सुपरस्टॉस राजेश खन्ना भी थे.  इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड भी मिला था. इसके बाद उन्होंने 'बॉम्बे टू गोवा' फिल्म में काम किया पर ये फिल्म ज्यादा सफल नहीं हो सकी.

1973 ही वह साल था जब अमिताभ ने 3 जून को जया भादुड़ी से शादी की. इस समय ये दोनों न केवल 'जंजीर' में बल्कि एक साथ कई फिल्मों में दिखाई दिए. 'अभिमान' इनकी शादी के एक महीने बाद ही रिलीज हुई. इसके बाद हृषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में 'विक्रम' की भूमिका वाली फिल्म 'नमक हराम' मिली. राजेश खन्ना और रेखा के साथ अमिताभ को भी इस फिल्म के लिए बेहद सराहना मिली. इस फिल्म के लिए अमिताभ को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. 15 अगस्त, 1975 को रिलीज हुई फिल्म 'शोले' ने भारतीय सिनेमाई दर्शकों के मन में अमिताभ बच्चन की अमिट छाप छोड़ी. ये फिल्म उस समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई.

राजीव गांधी के कहने पर अमिताभ ने राजनीति में कदम रखा. इलाहाबाद लोकसभा सीट पर एचएन बहुगुणा को चुनाव में हराने के बाद भी वो ज्यादा समय नहीं टिक सके और तीन साल बाद ही इस्तीफा देकर राजनीति से बाहर आ गए. इसके बाद अमिताभ ने अपनी एक कंपनी खोली. इसे वो बेस्ट कंपनी बनाना चाहते थे. कंपनी ने कई फिल्मों में जैसे-तैसे कई कलाकारों को मौका दिया.

एक समय ऐसा आया जब अमिताभ की सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं. 
तभी साल 2000 में अमिताभ को दूरदर्शन के चैनल स्टार प्लस पर एक ब्रिटिश शो WHO WANT TO BE A MILLIONAIRE के हिन्दी संस्करण यानी 'कौन बनेगा करोड़पति' में काम करने का ऑफर मिला. इस शो ने अमिताभ की जिंदगी बदल दी. ये शो सुपरहिट रहा. इससे अमिताभ की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी और उन्होंने अपने सारे कर्ज उतार दिए.

अमिताभ एक बार ऑल इंडिया रेडियो में नौकरी के लिए गए थे. लेकिन उन्हें वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा था, उस वक्त उन्हें ये कहा गया कि उनकी आवाज रेडियो के लिए फिट नहीं है. जबकि आज इसी आवाज के करोड़ों दीवाने हैं. अमिताभ की बेरीटोन वॉयस उनकी शख्सियत का बेहद खास हिस्सा है.  अमिताभ बच्चन ने फिल्मों में अपनी शुरुआत बतौर वोकल नैरेटर के रुप में ही की थी. 1969 में निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म में अमिताभ ने अपनी आवाज दी थी और इसी फिल्म से अमिताभ ने हिंदी फिल्मों में एंट्री की थी. 1977 में सत्यजीत रे की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी में भी उन्होंने आवाज दी थी.

बतौर अभिनेता अमिताभ की पहली फिल्म 'सात हिन्दुस्तानी' थी. 1969 में आई इस फिल्म के निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास थे. फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' अमिताभ की इकलौती ब्लैक एंड वाइट फिल्म थी. फिल्म 'जंजीर' ही वो फिल्म है जिसनें बिग बी को इंडस्ट्री का महानायक दिया. फिल्म 'जंजीर' से ही अमिताभ को पहचान मिली. लेकिन बता दें कि 'जंजीर' से पहले अमिताभ की लगातार 12 फिल्में फ्लॉप हुई थी.

अच्युत द्विवेदी

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