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रावण के वह 7 सपने, जो रह गए थे अधूरे

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0 comments, 2018-10-16, 78208 views

इस साल 19 अक्टूबर को विजयादशमी है. धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था. दशहरा का त्योहार लोग अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाते हैं. देवताओं को भी पराजित करने वाला रावण महापंडित और महाज्ञानी था. वह अपने बल और ज्ञान के अहंकार में खुद को ही भगवान मान बैठा था और ईश्वर के बनाए नियमों में बदलाव करना चाहता था. आइए जानते हैं कि  प्रकृति के विरुद्ध रावण के  7 सपने जो अधूरे रह गए थे.

1- स्वर्ग में सीढ़ी बनाना

रावण चाहता था कि हर व्यक्ति स्वर्ग जाए इसलिए वह धरती से लेकर स्वर्ग तक सीढ़ियां बनाने का काम शुरू कर चुका था, लेकिन जब तक यह सीढ़ी बनकर तैयार होती रावण भगवान राम के हाथों  मारा गया.


2-
सोने में सुगंध भरना 

रावण सोने का शौकीन था.  इसलिए उसने अपनी पूरी नगरी सोने की बनाई थी. रावण चाहता था कि सोने में सुगंध आ जाए. इससे सोने की तलाश आसान हो जाएगी

3-रंगभेद का खत्मा

रावण रंगभेद को खत्म करना चाहता था क्योंकि वह खुद काला था. रावण चाहता था कि सभी लोग गोरे दिखें ताकि कोई किसी को उनके सांवले रंग को लेकर मजाक न करे.

4-स्वयं की पूजा करवाना

रावण चाहता था कि सब उसकी पूजा करे और भगवान की पूजा करना बंद कर दे. लेकिन रावण का यह सपना उसके साथ ही टूट गया.

5- खून का रंग सफेद करना

खून का रंग लाल होता है जिसे रावण सफेद करना चाहता था ताकि उसके द्वारा किए जाने वाली हत्या का पता किसी को न चले.

6-समुद्र के पानी को मीठा करना

रावण को पता था कि पृथ्वी पर पीने का पानी कम है. अगर समुद्र का पानी मीठा हो जाए तो पीने के पानी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.


7-
मदिरा को गंधहीन बनाना

रावण अगर कुछ दिन और जीवित रहता तो मदिरा को गंधहीन बना देता. रावण चाहता था कि मदिरा में कोई गंध न हो जिससे 
सभी लोग मदिरापान का आनंद ले सकें.



UPPatrika
UPPatrika Team

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