बीएसए ने दबाई एबीआरसी के निलंबन की रिपोर्ट, भ्रष्टाचार की जीरो टालरेंस नीति पर सवाल

0 comments, 2019-04-03, 122200 views

गोंडा से उमानाथ तिवारी की रिपोर्ट। बीईओ ने बीएसए को भेजी थी निलंबन व रिकवरी की रिपोर्ट। यूनीफार्म वितरण की धनराशि हड़पने के दोषी हैं रुपईडीह के एबीआरसी देवेंद्र प्रताप। गोंडा। प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भले ही जीरो टालरेंस नीति पर काम करने की दावा करती हो लेकिन जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर सरकार की नीति से सहमत नहीं दिखते। भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई करने के बजाय विभाग के मुखिया ही भ्रष्टाचार के दोषी शिक्षक को बचाने मे जुटे हैं। बीएसए की इस लचर कार्यशाली से सरकारी धन के गबन का दोषी पाया गया ब्लाक सह समन्वयक पूरे विभाग पर भारी पड़ रहा है। जरा सी चूक पर शिक्षकों को निलंबित करने जैसी कार्रवाई के लिए जाना जाने वाले विभाग के मुखिया निलंबन व रिकवरी की रिपोर्ट को दबाए बैठे हैं। यह शिथिलता बीएसए की निष्पक्ष कार्रवाई पर सवाल खड़ा कर रही है। गोंडा। भ्रष्टाचार का यह मामला रुपईडीह ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय तेलियानी पाठक के प्रधानाध्यापक देवेंद्र प्रताप सिंह से जुड़ा है। देवेंद्र प्रताप ब्लाक के सह समन्वयक भी हैं। वित्तीय वर्ष 2016-17 में विद्यालय के 114 छात्र छात्राओं को स्कूल यूनिफार्म वितरित करने के लिए विद्यालय प्रबंध समिति के बैंक खाते में 34200 रुपये भेजे गए थे। इसके बाद 25% धनराशि के रूप में 11399 की धनराशि फिर से भेजी गई। यह धनराशि यूनीफार्म सप्लाई करने वाली फर्म को चेक के जरिए भुगतान की जानी थी लेकिन एबीआरसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने 45599 की पूरी धनराशि चेक के जरिए अपने निजी खाते में डालकर उसका भुगतान करा लिया। इसके बाद एक अन्य चेक के माध्यम से उन्होने 11399 रुपये यूनीफार्म सप्लाई करने वाली फर्म मिश्रा एंड संस को भी भुगतान कर दिया। इस मामले को लेकर अधिवक्ता अमित कुमार पाठक ने शिकायत दर्ज कराई थी। बीईओ की रिपोर्ट मे हुआ था गबन का खुलासा गोंडा। अधिवक्ता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए रुपईडीह के खंड शिक्षा अधिकारी अश्विनी प्रताप ने जांच की तो पाया गया कि प्रधानाध्यापक ने यूनीफार्म के लिए 125% धनराशि का भुगतान किया गया है। बीईओ ने इसके लिए एबीआरसी/प्रधानाध्यापक देवेंद्र प्रताप सिंह को दोषी माना और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट भेजी। जांच रिपोर्ट में एबीआरसी देवेंद्र प्रताप सिंह को निलंबित करने व विभागीय कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की गई थी। लेकिन बीएसए मनिराम सिंह ने अपने इस चहेते शिक्षक पर कार्रवाई करने के बजाय इस पूरी रिपोर्ट को ही दरकिनार कर दिया। बीएसए की इस मेहरबानी ने विभाग की पारदर्शी कार्यशाली व भ्रष्टाचार पर योगी सरकार की जीरो टालरेंस नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही छोटी सी गलती पर शिक्षकों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई भी सवालों के घेरे मे आ गई है।

UPPatrika
उमानाथ तिवारी
संवाददाता
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