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आदर्श आचार संहिता तोड़ बीईओ ने कर डाला एनपीआरसी चयन

0 comments, 2019-04-07, 314054 views

उमानाथ तिवारी द्वारा स्पेशल रिपोर्ट। परसपुर बीईओ का कारनामा, चयनित सूची भी जारी गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग में इस समय अजब गजब- खेल चल रहा है। एनपीआरसी चयन मे हाईकोर्ट की फटकार व जुर्माने की कार्रवाई से दंडित होने के बाद हो रही किरकिरी के बीच परसपुर बीईओ ने न सिर्फ पूर्व मे चयनित किए गए एनपीआरसी का चयन निरस्त कर दिया बल्कि उसी दिन नए एनपीआरसी का चयन भी कर डाला। यहीं नहीं चयन सूची भी सार्वजनिक करते हुए उसे जारी कर दिया। एनपीआरसी चयन करते वक्त बीईओ को यह भी ध्यान नहीं रहा कि जिले मे आदर्श आचार संहिता प्रभावी है और आचार संहिता मे किसी भी नई प्रक्रिया को अमल मे नही लाया जा सकता। इस चयन प्रक्रिया के बाबत जब एडीएम से जानकारी की गई तो उन्होने कहा कि आचार संहिता लागू होने के कारण कोई भी नया काम नही किया जा सकता। शिकायत मिलने पर इसकी जांच कराई जाएगी। हाईकोर्ट ने बीएसए पर ठोंका था जुर्माना। गोंडा। दरअसल बेलसर ब्लाक के एक शिक्षक भगवानदीन ने जिले में एनपीआरसी(न्याय पंचायत समन्वयक ) चयन मे अनियमितता का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट मे याचिका दाखिल की थी। याची भगवानदीन का कहना था कि उन्हे न्याय पंचायत के वरिष्ठ शिक्षक होने के कारण उन्हे एनपीआरसी बनाया गया था लेकिन बीएसए ने उन्हे हटाकर उनसे जूनियर शिक्षकों को यह दायित्व सौंप दिया। इस पर हाईकोर्ट ने बीएसए मनिराम सिंह को फटकार लगाते हुए दो हजार रुपये का जुर्माना ठोंका था और दो दिन के भीतर विभागीय नियमों के मुताबिक एनपीआरसी चयन के विवाद के निपटारे का आदेश दिया था। इसके बाद बीएसए ने जिले भर के बीईओ को पत्र जारी कर एनपीआरसी चयन की समीक्षा कर रिपोर्ट तलब की थी। इस पत्र के जारी होते ही परसपुर ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी आरपी सिंह ने पूरे ब्लाक के एनपीआरसी चयन के निरस्त कर दिया और आदर्श आचार संहिता प्रभावी होने के बावजूद उसी दिन नए एनपीआरसी का चयन भी कर डाला। जबकि आचार संहिता के लागू होने के कारण नए चयन की कार्रवाई नहीं की जा सकती। नहीं ली डीएम/ जिला निर्वाचन अधिकारी की अनुमति गोंडा। आदर्श आचार संहिता के बीच एनपीआरसी चयन की कार्रवाई को लेकर जब अपर जिलाधिकारी रत्नाकर मिश्र से बात की गई तो उन्होने बताया कि आचार संहिता प्रभावी होने के कारण मामले की जांच तो कराई जा सकती है लेकिन नया चयन नहीं किया जा सकता। इसके लिए पहले जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी की अनुमति ली जानी चाहिए। उन्होने कहा कि अगर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।


UPPatrika
उमानाथ तिवारी
संवाददाता
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