Breaking News

जैन मुनि तरुण सागर का निधन, संत बनने के पीछे की यह है पूरी कहानी

सम्बंधित लोकप्रिय ख़बरें

0 comments, 2018-09-01, 373041 views

नई दिल्ली। जैन मुनि तरुण सागर का आज सुबह दिल्ली में 51 साल की उम्र में निधन हो गया. वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. आज दोपहर 3 बजे दिल्ली मेरठ हाइवे पर स्थित तरुणसागरम तीर्थ में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. उनका असली नाम पवन कुमार जैन था.  जैन समाज की ओर से जारी बयान में जैन मुनि तरुण सागर के संथारा लेने का दावा किया गया है. दिल्ली जैन समाज के अध्यक्ष चक्रेश जैन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तरुण सागर अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराज की स्वीकृति के बाद संथारा ले लिया और शनिवार सुबह 3 बजकर 11 मिनट पर उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है.

बता दें कि, करीब 20 दिन पहले जैन मुनि तरुण सागर को पीलिया की शिकायत के बाद मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के बाद भी उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने अपना इलाज करवाने से मना कर दिया था और अपने अनुयायियों के साथ गुरुवार शाम को दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास आ गए.

मध्य प्रदेश के दमोह जिले के गुंहची गांव में 26 जून, 1967 को जैन मुनि तरुण सागर का जन्‍म हुआ था. उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था. तरुण सागर ने आठ मार्च, 1981 को 14 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया था और इसके बाद छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली.  उन्होंने आचार्य विद्यासागर से ब्रह्मचर्य की दीक्षा ली. तरुण सागर बचपन से ही काफी धार्मिक थे.  शुरू से ही धर्म में उनका काफी लगाव रहता था.  20 साल की उम्र में वह मुनि तरुण सागर बन गए.  तरुण सागर को आचार्य पुष्पदंग सागर ने मुनि दीक्षा दी. 

जैन संत तरूण सागर महाराज शुरू से ही अपने कड़वे प्रवचनों के लिए जाने जाते रहे थे. उन्होंने कई बार कड़वे बयान भी दिए. एक बार तो उन्होंने कुलभूषण जाधव से मिलने गई उनकी मां और पत्नी के साथ हुए बुरे बर्ताव को लेकर पाकिस्तान पर तीखी प्रतिक्रिया दी.  उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में जितने आतंकवादी नहीं है उससे ज्यादा भारत में गद्दार है. एक बयान में उन्होंने कहा था कि अगर तुम्हारी वजह से कोई इंसान दुखी रहे, तो समझ लीजिए कि यह तुम्हारे लिए सबसे बड़ा पाप है, ऐसे काम करो कि लोग तुम्हारे जाने के बाद दुखी हो और आसूं बहाए, तभी तुम्हें पुण्य मिलेगा.

अच्युत द्विवेदी



UPPatrika
पवन श्रीवास्तव
संपादक
और न्यूज़ पढ़ें

0 Comments

सम्बंधित लोकप्रिय ख़बरें

Leave a comment

Your email address will not be published, all the fields are required.


Comments will be shown after approval .

पोल   करें

AJAX Poll Using jQuery and PHP

X

Loading...