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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कई सालों बाद बन रहा है ऐसा दुर्लभ संयोग

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अच्युत द्विवेदी

हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था. द्वारकाधीश, माखनचोर और कन्हैया जैसे कई नामों से भक्तों के बीच पहचाने जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण का जन्म  भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को  हुआ था.  इस दिन को लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर चारों तरफ उत्साह बना हुआ है. लेकिन ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बन रहा है, जैसा द्वापर युग में कन्हैया के जन्म के समय बना था.  इस खास संयोग को कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है. आपको बता दें कि, भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में आधी रात यानी बारह बजे रोहिणी नक्षत्र हो और सूर्य सिंह राशि में तथा चंद्रमा वृष राशि में हों, तब श्रीकृष्ण जयंती योग बनता है.

इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 2 और 3 सितंबर को मनाई जाएगी.कारण यह है कि  इस बार अष्टमी तिथि 2 सितम्बर की रात 08:51 पर लगेगी और 3 तारीख की शाम 07:21 पर खत्म हो जायेगी.
 ऐसे में लोगों में दुविधा है कि आखिर किस दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाए. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ऐसी स्थिति में निर्णय सिंधु के अनुसार अष्टमी व्यापिनी तिथि में ही जन्माष्टमी का पर्व मनाना शास्त्र सम्मत है.  ऐसे में दो सितंबर को व्रत, जागरण और तीन सितंबर को जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ है.
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि किसी भी पर्व के दिन को तय करने में तिथि महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है. वार और नक्षत्र का इसमें इतना असर नहीं पड़ता है. इस लिहाज से निर्णय सिंधु के अनुसार दो सितंबर को अर्द्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी को व्रत, उपवास और जागरण करना शुभ है, जबकि अगले दिन तीन को जन्मोत्सव को मनाया जाना चाहिए.


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UPPatrika Team

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