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जानिए कब से शुरु हो रहा है पितृ पक्ष, कहां कहां होता है पिंडदान

0 comments, 2018-09-21, 152750 views

श्राद्ध पक्ष 24 सितंबर से शुरू होने जा रहे हैं. श्राद्ध का अर्थ है, अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रगट करना. पुराणों के अनुसार, मृत्यु के बाद भी जीव की पवित्र आत्माएं किसी न किसी रूप में श्राद्ध पक्ष में अपनी परिजनों को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आते हैं. पितरों के परिजन उनका तर्पण कर उन्हें तृप्त करते हैं. ऐसी मान्यता है कि आश्विन कृष्ण पक्ष के 15 दिनों में (प्रतिपदा से लेकर अमावस्या) तक यमराज पितरों को मुक्त कर देते हैं और समस्त पितर अपने-अपने हिस्से का ग्रास लेने के लिए अपने वंशजों के समीप आते हैं, जिससे उन्हें आत्मिक शांति प्राप्त होती है.

ऐसी मान्यता है कि मरने के बाद पिंडदान करना आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति कराता है. पिंडदान करने का सबसे ज्यादा महत्व बिहार के गया का है। इसी जगह पर भगवान राम ने राजा दशरथ का पिंडदान किया था. हालांकि, इसके अलावा देश में कुछ अन्य जगहों पर भी पिंडदान किया जाता है. मान्यता है कि स्वयं भगवान विष्णु यहां पितृ देवता के रूप में मौजूद हैं और यदि इस स्थान पर पिण्डदान किया जाय, तो पितरों को स्वर्ग मिलता है. इसलिए इसे पितृ तीर्थ भी कहा जाता है.

पिंडदान की अन्य जगह


बद्रीनाथ, उत्तराखंड

चार प्रमुख धामों में से एक बद्रीनाथ के ब्रहमाकपाल क्षेत्र में तीर्थयात्री अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं. कहा जाता है कि पाण्डवों ने भी अपने पितरों का पिंडदान इसी जगह किया था.

काशी
ऐसी मान्यता है कि काशी में मरने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह नगर भगवान शिव का माना जाता है। काशी में पिशाचमोचन कुंड पर श्राद्ध का विशेष महत्व होता है. इस स्थान पर अकाल मृत्यु होने पर पिंडदान करने पर मोक्ष प्राप्त होता है.
इलाहाबाद
प्रयाग को सभी तीर्थों में प्रमुख स्थान माना जाता है. यहां पर तीन नदिया गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। पितृपक्ष में प्रयाग का विशेष स्थान है। पितृपक्ष में बड़ी संख्या में लोग यहां पर अपने पूर्वजों को श्राद्ध देने आते है.

पिण्डारक, गुजरात
गुजरात के द्वारिका से 30 किलोमीटर की दूरी पर पिण्डारक स्थान है यहां पर एक नदी है जहां पर श्राद्ध कर्म करने के बाद नदी मे पिण्ड डालते हैं और अपने पितरों की आत्मा की शान्ति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं.

सिद्धनाथ , मध्य प्रदेश
यह स्थान उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे है. यहां पर भी पितरों को श्राद्ध अर्पित करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर एक वटवृक्ष है जिसे माता पार्वती ने अपने हाथो से स्वयं लगाया था. पितर पक्ष में बड़ी संख्या में लोग इस स्थान पर अपने पितरों को श्राद्ध देते हैं.




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UPPatrika Team

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