Breaking News

शारदीय नवरात्रि 2018: यह है कलश पूजन का शुभ मुहूर्त, इस वाहन पर सवार होकर आएंगी मां

0 comments, 2018-10-07, 248066 views

देवीभागवत् में बताया गया है कि ‘शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता’ अर्थात- रविवार और सोमवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं. शनिवार और मंगलवार को कलश स्थापना होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है. गुरुवार और शुक्रवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता डोली पर चढ़कर आती हैं. जबकि बुधवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं. 

नौका पर सवार होकर आएंगी मां 
10 अक्टूबर 2018, बुधवार से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि 19 अक्टूबर, शुक्रवार को समाप्त होंगे. इस बार मां नौका से प्रस्थान कर रही हैं. इसका अर्थ है कि इस बार देवी पृथ्वी के समस्त प्राणियों की इच्छाओं को पूर्ण करेंगी. मां का जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक पूजन और व्रत अर्थात निर्मल मन से शुभ फल की इच्छा करेंगे, मां दुर्गा उनकी मनोकामना पूर्ण करेंगी. देवी नवरात्रि के अंतिम दिन यानि विजयदशमी को पृथ्वी से कैलाश की ओर हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी. मां के प्रस्थान का अर्थ है कि मां अच्छी फसल के साथ ही सुख और समृद्धि का वरदान देकर जाएंगी. 
पंडितों के अनुसार इस नवरात्रि की शुरुआत चित्रा नक्षत्र में हो रही है. वहीं महानवमी का आगमन श्रवण नक्षत्र में होगा. इस दिन ध्वज योग बन रहा है, जिसके कारण सुख और वैभव बढ़ेगा. इस बार पहली नवरात्रि के दिन घट स्थापना होगी और इसी दिन दूसरी नवरात्रि भी मनाई जाएगी. एक नवरात्रि के कम होने के बाद भी नवरात्रि नौ दिनों की ही होगी.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

प्रतिपदा को कलश स्थापना के लिए ब्रह्म मुहूर्त से सुबह 7.56 मिनट तक का समय सबसे अच्छा है. इस बीच कलश स्थापना कर लेनी जानी चाहिए. यदि ऐसा संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त में दिन के 11.36 बजे से दोपहर 12.24 बजे के बीच कलश स्थापना करें. नवरात्रि पर्व, माँ-दुर्गा की अवधारणा भक्ति और परमात्मा की शक्ति (उदात्त, परम, परम रचनात्मक ऊर्जा) की पूजा का सबसे शुभ और अनोखा अवधि माना जाता है. यह पूजा वैदिक युग से पहले, प्रागैतिहासिक काल से है.

 ऋषि के वैदिक युग के बाद से, नवरात्रि के दौरान की भक्ति प्रथाओं में से मुख्य रूप गायत्री साधना का हैं. नवरात्रि और मौसमी परिवर्तन के काल के दौरान अनाज आम तौर पर परहेज कर दिया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अनाज नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता हैं. नवरात्रि आत्मनिरीक्षण और शुद्धि का अवधि है और पारंपरिक रूप से नए उद्यम शुरू करने के लिए एक शुभ और धार्मिक समय है.




UPPatrika
G K Srivastav
संवाददाता
और न्यूज़ पढ़ें

0 Comments

Leave a comment

Your email address will not be published, all the fields are required.


Comments will be shown after approval .

पोल   करें

AJAX Poll Using jQuery and PHP

X

Loading...

X