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मंगली माता के मन्दिर में पूजा करने से महिलाओं की पूरी होती है हर मनोकामना

0 comments, 2018-10-11, 223626 views

मंगली माता के मन्दिर में पूजन से महिलाओं की मनोकामना पूर्ण होती है. श्रद्धालु यहां अपने कन्याओं और बच्चों को शीश झुकाने के लिए लाते रहें है जिससे उनको किसी प्रकार से अकाल के प्रकोप से बचाया जा सके.

गोंडा। कर्नलगंज नगर के बालूगंज में स्थित वर्षों पुराना देवी स्थान लोगों के लिए श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है. मंगली माता के स्थान के बारें में कोई लिखित साक्ष्य न होने के बावजूद भी मंगली माता के भक्तों का कहना है कि इस बस्ती के नगर के बीचो बीच स्थित देवी मां के पिण्डी रूप  मे पूजन अर्चन का महत्व सैकड़ों वर्षो से चला आ रहा है. चैत्र व शारदीय नवरात्रि में यहां भक्तों द्वारा विषेष पूजन का आयोजन किया जाता है. बताया जाता है कि पहले आस पास के श्रद्धालु यहां अपने कन्याओं और बच्चों को शीश झुकाने के लिए लाते रहें है जिससे उनको किसी प्रकार से अकाल के प्रकोप से बचाया जा सके. पहले केवल पिण्डी रूप में ही श्रद्धालु अपने देवी पूज्य मंगली माता की पूजा अर्चना करते रहे. केवल नीम के पेड़ के पास स्थित तीन पिण्डियों में ही मां का रूप समाया हुआ था,आस पास ही नही दूसरे गांवों के लोग भी यहां आकर महिलाओं केसाथ परिवार की सुखसमृद्धि व पति के दीर्घायु की कामना को लेकर आते तथा कुछ घरों में किसी भी मांगलिक कार्यक्रमों के पूर्व माता के मन्दिर पर प्रथम पूजन का भी विधान आज भी कायम है.


सोमवार और शुक्रवार को सुबह व शाम भीड़ दिखती थी किन्तु कालान्तर में पिण्डी को मन्दिर का रूप दिया गया जिसमें स्वर्णकार संघ व स्थानीय भक्तों का विषेष योगदान रहा है.  वर्तमान में नीम के पेड़ के पास स्थित पिण्डी में ही छोटे मन्दिर के रूप में जीर्णाद्धार करा दिया गया जिससे मन्दिर में प्रांगण व चार दीवारी का निर्माण कराया गया. मन्दिर के प्राचीन स्थान की महिमा बताते हुए पं. दिनेश शुक्ला कहते हैं कि नवरात्रि में नियमित पूजन से भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है.  चैत्र नवरात्रि में यहां संघ की ओर से नौ दिन पूजन हवन व प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है.शारदीय नवरात्रि में भी हवनपूजन को विधि विधान से सम्पन्न कराया जाता है.

नगर में वैसे तो कई स्थानों पर देवी मन्दिर बने हुए हैं जिनमें गांधीनगर की काली माता,रेलवे स्टेशन रोड पर शरबामाई स्थान व मौर्य नगर चौराहे के पास शीतला माता सकरौरा में गायत्री माता शक्ति पीठ ,हरीदास नाका के निकट संतोषी माता व परसपुर मार्ग पर मरीमाता का मन्दिर का स्थान वर्षो से प्रचलित है.इनमें चैत्र नवरात्रि में भी विशेष आयोजन होता है.

कर्नलगंज नगर में दुर्गापूजा कार्यक्रमों की धूम अस्सी के दशक से शुरू हुई तो नब्बे के दशक में वर्ग विवाद के चलते अपने पूर्ण उत्साह व उल्लास के साथ नगर के प्रमुख(मौर्य नगर चौराहा, कैलाषबाग,षरबामाईथान व बसस्टाप आदि) चार स्थानों पर विषेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मूर्तिरख कर विशेष कार्यक्रम सम्पन्न कराया जाता है और इनमें शारदीय नवरात्रि में प्रतिष्ठापित मूर्तियों को नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए पवित्र सरयू नदी में विसर्जित किया जाता है.




UPPatrika
G K Srivastav
संवाददाता
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